चाँद सूरज से ज़मीं की पैरवी करता रहा
खुद अँधेरे में रहा पर रौशनी करता रहा
खुद अँधेरे में रहा पर रौशनी करता रहा
तितलियाँ गजलों से उड़ कर गैर के घर जा बसीं
और शायर काफ़ियों से मसखरी करता रहा
और शायर काफ़ियों से मसखरी करता रहा
तुम न थे, बारिश न थी, झोंका न था, मौसम न था
कुछ न था, पर कुछ तो था जो गुदगुदी करता रहा
कुछ न था, पर कुछ तो था जो गुदगुदी करता रहा
क्या सज़ा दूँ उस कबूतरबाज़ शातिर चोर को?
आँख के रस्ते जो दिल की तस्करी करता रहा
आँख के रस्ते जो दिल की तस्करी करता रहा
फिर से वो आवाज़ आई 'अब हमें इन्साफ दो'
और दिल्ली का 'मसीहा' दिल्लगी करता रहा
और दिल्ली का 'मसीहा' दिल्लगी करता रहा
अंग-रेजी बोल कर सब लूट कर वो ले गए
और अपना मुल्क़ हिंदी-फ़ारसी करता रहा
और अपना मुल्क़ हिंदी-फ़ारसी करता रहा
